कमाल की पूजा थाल, अपने हुनर और सौंदर्यबोध से एसएचजी की महिलाओं ने तैयार किये, बिक्री के लिए तैयार

दुर्ग। अब तक दीवाली पर चायनीज उत्पादों के चकाचैंध देखने वाले ग्राहक इस बार बिल्कुल विशुद्ध छत्तीसगढ़ी सौंदर्यबोध से सजी पूजा की थाली बाजार में देखेंगे। थाली के बीच में गणेश जी हैं इसके चारों ओर डिजाइनर दीये सजे हैं। इस तरह की अनेक सुंदर पूजा की थालियां बाजार में हैं जो दीपावली को लेकर स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने बनाई है। इसके साथ ही डिजाइनर दीयों के सेट भी हैं जो बेहद कम कीमतों पर उपलब्ध हैं। प्रशासन ने इन महिलाओं को आकर्षक दीये बनाने की ट्रेनिंग प्रदान की, सांचे जैसी सामग्री उपलब्ध कराई।

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फिर इन्होंने अपना हुनर लगाया और सौंदर्यबोध के माध्यम से बहुत सुंदर कलाकृतियां तैयार कीं। दीयों के साथ ही पूजा की थाली में गणेश जी की भी छोटी सी मूर्ति है। देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने के सांचे भी इन्हें उपलब्ध कराये गए हैं। भिलाई में स्वसहायता समूहों की लगभग 400 महिलाएं हर दिन दीये बना रही हैं। भिलाई नगर निगम आयुक्त ने इनके उत्पादों के विक्रय के संबंध में बाजार के लिए निगम अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया है। शिवाजी नगर स्थित सत्यमेव महिला समिति की अध्यक्ष श्रीमती भारती पखाले ने बताया कि सवा सौ महिलाएं हर दिन बड़ी संख्या में दीये बना रही हैं।

इनके सेट की कीमत अलग-अलग रखी गई है। उन्होंने बताया कि हमारे काम का फोकस डिजाइनर, डेकोरेटिव और डिवोशनल है। दीवाली की पूजा सामग्री के बाजार के मुताबिक चीजें हम लोगों ने तैयार की है। ग्राहक इनकी खरीदी के लिए संपर्क कर रहे हैं। हम लोगों ने उत्पादों की गुणवत्ता और सुंदरता पर विशेष तौर पर फोकस किया है। चटख रंगों के प्रयोग के कारण दीयों का सेट बहुत सुंदर दिख रहा है। श्रीमती पखाले ने बताया कि हमने सेंटर में न आ पाने वाली महिलाओं को भी सुविधा प्रदान की है उन्हें सामग्री तथा सांचे प्रदान किये जा चुके हैं लगभग सौ ऐसी महिलाएं हैं जो अपने घर से ही यह काम कर रही हैं।

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जोन वन नई उड़ान समिति की अध्यक्ष श्रीमती सुलोचना धनकर बताती हैं कि उनका समूह हर दिन लगभग हजार दीये बना रहा है और अब  दीवाली चूंकि काफी करीब है हम अपना लक्ष्य काफी बढ़ा देंगे। हमने अपना फोकस प्रोडक्ट की सुंदरता और विविधता पर रखा है। समूह की कोशिश होगी कि जो भी थोक में चीजें खरीदना चाहें, उन्हें प्रोडक्ट की विविधता मिले तथा पर्याप्त मात्रा में हम उन्हें सामग्री उपलब्ध करा सके। इसके लिए चूंकि काफी पहले से ही काम किया जा रहा है अतएव आसानी से हम लोग अपना लक्ष्य प्राप्त कर पाएंगे। उल्लेखनीय है कि दीवाली का अवसर गोमाता की पूजा का अवसर भी होता है। इसे ध्यान में रखते हुए यह सभी उत्पाद गोबर से और सहायक सामग्रियों से तैयार किये गए हैं।

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