भूपेश के नरवा, गरुआ, घुरुवा और बारी कांसेप्ट सात समंदर पहुंचा, ब्रिटिश संसद में सीएम का किया जाएगा सम्मान

छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल के दो महीने में किए गए कार्यो की गूंज अब सात समंदर पार भी पहुंच गई है। आदिवासियों की अधिग्रहित जमीन को वापस लौटाने अभूतपूर्व फैसले के लिए ब्रिटिश संसद में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का सम्मान किया जाएगा।  यह सम्मान ब्रिटिश संसद हाउस और हाउस ऑफ लार्डस में 19 मई को किया जाएगा। इसके अलावा नरवा, घुरवा, गरुआ और बाड़ी  के कांसेप्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए भी उन्हें प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। यह पहला ऐसा मौका होगा जब छत्तीसगढ़ के किसी मुख्यमंत्री को इंग्लैंड के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे।

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बतादें कि बस्तर के लोहंडीगुडा में टाटा संयंत्र लगाने के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का उपयोग न होने पर भूस्वामी आदिवासियों को लौटाने के छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार के विदेशी मीडिया में खुब सराहना हुई थी। ब्रिटिश संसद ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आमंत्रित करने के साथ ही प्रशस्ति पत्र भी भेजा है।

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यह प्रशस्ति पत्र जमीन लौटाने के फैसले के साथ ही नरवा, गरुआ, घुरुवा और बारी के कांसेप्ट को अमल में लाने के लिए दिया गया है। मुख्यमंत्री ने यह आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। वे 19 मई को ब्रिटिश संसद को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री ट्राईबल वेलफेयर मामले को और आगे बढ़ाने क्या किया जा सकता है, विषय पर संबोधित करें।

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